feathers...
Saturday, 30 December 2017
कुछ इस कदर चाहा है मेने खुद को
के उमींदे खुद से तोड नहीं सकती ।
तोड़ सकती हूं हार की हर दीवार
पर जीत का दामन छोड़ नहीं सकती।।
प्रकाश को निहारती मै
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment