सच्चाई
जिंदगी के इस सफ़र में
कई गलतफेमिया सी रही है मुझको
जादा ऐतबार करने की
आदत सी रही है मुझको
साबित करता है मेरा रुदन
मै अकेली ही हू
अपनों से बहुत दूर
तनहा चल रही हू
यु तो हर महफ़िल मुझ बिगर
अधूरी सी है
फिर भी न जाने क्यों
हर नज़र थोड़ी खफा सी है
ये तो सच है की
कोई किसी की तन्हाई दूर किया नहीं करता
पर ये भी झूट नहीं के
कोई सच में साथ दिया नहीं करता...
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