Saturday, 29 October 2011

                   वजह  

उसने बदलना तो न था इस कदर 
पर चलो उनकी कोई मज़बूरी रही होगी 
हमसे मुह फेरने की कोई न कोई 
वजह तो जरुर रही होगी...

 इस बात से तो हम वाकिफ हैं के 
हमे कोई यु भूला नहीं सकता 
पर कोई हमारा वजूद  ही मिटा दे तो 
कुछ कहा नहीं जा सकता...

दरमाया दूरिया आने के उन्हें भी 
खलल तो जरुर रही होगी
हमसे मुह फेरने की कोई न कोई 
वजह तो जरुर रही होगी...

ख्त्म करने को तो हम 
आज ख्त्म कर दे ये रंजीसे
पर हमे जोर देकर अपनी
पहचान बनानी नहीं आती...
   


 

  

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