Saturday, 29 October 2011

वो बात अलग है के
हम जरा खुशनुमा से है ...
पर इसका ये मतलब नहीं दोस्तों 
हमे दर्द नहीं होता ...
हम करते रहे दुआ की
उन्हें उनकी हर ख़ुशी गवारा हो
बिना जाने के हम उनकी खुशियों में  
शामिल ही नहीं...
    
                   वजह  

उसने बदलना तो न था इस कदर 
पर चलो उनकी कोई मज़बूरी रही होगी 
हमसे मुह फेरने की कोई न कोई 
वजह तो जरुर रही होगी...

 इस बात से तो हम वाकिफ हैं के 
हमे कोई यु भूला नहीं सकता 
पर कोई हमारा वजूद  ही मिटा दे तो 
कुछ कहा नहीं जा सकता...

दरमाया दूरिया आने के उन्हें भी 
खलल तो जरुर रही होगी
हमसे मुह फेरने की कोई न कोई 
वजह तो जरुर रही होगी...

ख्त्म करने को तो हम 
आज ख्त्म कर दे ये रंजीसे
पर हमे जोर देकर अपनी
पहचान बनानी नहीं आती...
   


 

  
कम्बक्थ उस फूल से हम 
महक मांग बैठे
जो सदियों से ... अपनी जड़ 
से जुदा हुए बैठे थे ...
       

 

Friday, 21 October 2011

तुम होते तो
यु तो वक्त गुजर ही  जाएगा 
लम्बा सफ़र तय हो ही जाएगा
पर तुम होते तो
बात कुछ और ही  होती...

चलने  को तो साँसे चलती ही रहेगी
धड़कन भी साथ देती ही  रहेगी 
पर तुम होते तो 
बात कुछ और ही  होती...
  
उत्सव भी सारे मनाये जाएगे
रंगीनियों मे भी शामिल हो ही  जाएगे
पर तुम होते तो 
बात कुछ और ही  होती...

सफलता मिलने की खुशिया भी होगी
जशन भी होगा मिठाईया भो होगी
पर तुम होते तो 
बात कुछ और ही  होती...

ठोकर मिले पर सान्तवना भी मिलेगी
रोने के लिए कंघा, दिलासा भी मिलेगी
पर तुम होते तो 
बात कुछ और ही  होती...

दुनिया की भीड़ मे शामिल भी होगे
सारे सपने साकार भी होगे
पर तुम होते तो 
बात कुछ और ही  होती...

सब कुछ होगा
काश तुम भी होते 
पर तुम होते तो 
इस काश शब्द की जरुरत ही  न होती...