Thursday, 30 July 2020

आँखे दिखाकर मुझे डराना मुमकिन नहीं,

हाँ मगर आंखे दिखाकर रीझा लो इसकी गुंजाईश जरूर है...

                                                                               

Wednesday, 19 February 2020

इंसानियत की पूर्णता

आज बड़ा चिंतन कर 

एक राह पर चली तो हूँ
पर इस सोच में पड़ी हूँ
के क्या हासिल कर सकी हूं
वह राह बड़ी धुंदली सी है 
कुछ पकड़ने से पहले ही
सब चीज़ निकल पड़ी है
चलो बता ही दूँ के 
क्या खोजने चली हूँ
मैं इस कलयुग में
इंसानियत ढूंढ़ने चली हु !!
पता है कुछ हाथ न लगेगा 
पर फिर भी चल रही हूँ


इधर नज़र घुमाई तो मक्कारी नज़र आयी

उधर नज़र घुमाई तो डकैती
फिर सोचा, किसी मंदिर मे चलू
शायद कुछ शांति मिल जाये 
पर यहाँ भी निराशा ही हाथ लग पायी
ईश्वर कुछ नाराज़ से नज़र आये 
मन्न मे कुछ सोचते से नज़र आये
वह सोचते होंगे , मे क्यों इनका भला करू
जब ये किसी का नहीं करते 
किसी भूखे को एक रोटी भी दान नहीं करते


फिर थोड़ी दूर और चली

एक बूढ़ी माँ नज़र आयी
मेने पूछा क्या बात है माँ जी !!
वह कुछ रोती सी नज़र आयी
आज बेटे ने माँ को मारा था 
और यही कारण है एक माँ का विश्वास टूटा था

इतना देखने के बाद आगे चलने की 

हिम्मत न जुटा पायी और फिर'
दिमाग मे वापिस लौटने की बात आयी
पर फिर न जाने किसनें मुझ से कुछ पूछा
के क्या ढूंढ़ने चली थी इंसानियत ?!
सहमी सी मैं कुछ न कह पायी
शायद उन्होंने मेरा चेहरा पढ़ा
और मुझसे से कहा 


के तू बिलकुल वर्थ है

तेरा कोई अस्तित्व नहीं !
मे बर्फ के समान जम गयी
इस कदर ज़मी
के रोने का दिल किआ पर एक भी आंसू 
बाहर  न आयी
सब सुन्न सा हो गया था 
सब ठहर सा गया था 
यह ठहराव बस मेरे लिए था आज ये दिल चकनाचूर हो गया था'

फिर से उन्होंने कुछ कहा था शायद

पर कुछ सुनाई नहीं दे रहा था 
फिर एक तूफ़ान सा आया 
जिसने मुझे जगाया
फिर उन्होंने मुझ से पूछा 
के क्या तू कुछ कर नहीं सकती???
क्या इस निर्ममता को कुछ कम् नहीं कर सकती
अगर नहीं तो तू बेकार है


उस दिन से आज तक मेरा मन्न इस सोच मे हैं

के ये जीवन और ये काया वर्थ है
उस दिन मुझे पूर्णता प्राप्त होगी 
जिस दिन मे कुछ कर सकुंगी

और अगर इस राह पर चलते चलते 

मेरे कदम डगमगाएँगे तो
हे ईश्वर! आपसे एक ही विनती हे
मुझे केवल नर्क की ही प्राप्ति हो
और इस वर्थ काया की समाप्ति हो।।



वेदना सी भरी पर कुछ ठोस जोड़ने को तैयार मैं शालिनी !



धन्यवाद!





Sunday, 31 December 2017

Why to depend on BEST wishes,

Let's CREATE a BEST year !!!
                                             isn't it ?

Saturday, 30 December 2017

कुछ इस कदर चाहा है मेने खुद को

के उमींदे खुद से तोड नहीं सकती ।

तोड़ सकती हूं हार की हर दीवार

पर जीत का दामन छोड़ नहीं सकती।।


                        प्रकाश को निहारती मै




  

Tuesday, 5 December 2017



नहीं जानती के कब तक खुद से जुदा रहूंगी

पर ये भी सत्य हे एक दिन खुद को पाकर रहूंगी...

                                                          ज़िद्दी मै

Friday, 1 December 2017


Emotions are fragile,

mishandling can lead to damage ...

                      
                  Parcel-  "Handle with care"

Friday, 27 October 2017

आउगी ऐ ज़िन्दगी तेरे पास 

तू कुछ पल और ठहर जा...

अभी तो खुद से मिले भी

एक अर्सा बीत गया...